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‘मेलोडी’ टॉफी के चक्कर में इस शेयर ने किया कमाल, 22 दिन में पैसा हुआ डबल

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Posted On:Friday, June 12, 2026

शेयर बाजार और निवेशकों के मनोविज्ञान का रिश्ता बेहद अनोखा होता है। कई बार बाजार में किसी ठोस वित्तीय रिपोर्ट, मुनाफे या तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि केवल एक अफवाह, सोशल मीडिया ट्रेंड या नाम की समानता (Confusing Ticker/Name) के कारण भी शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिलता है। हाल ही में एक ऐसा ही हैरान करने वाला और बेहद दिलचस्प मामला भारतीय शेयर बाजार में देखने को मिला, जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक खास तोहफे ने अनजाने में निवेशकों की किस्मत बदल दी और देखते ही देखते एक गुमनाम शेयर रॉकेट बन गया।

दरअसल, यह पूरा मामला पिछले महीने का है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर गए थे। वहां द्विपक्षीय बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की मशहूर चॉकलेट-टॉफी ‘मेलोडी’ (Melody) भेंट की थी। जॉर्जिया मेलोनी ने इस खुशनुमा मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। देखते ही देखते यह वीडियो इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह वायरल हो गया। दोनों देशों के राष्ट्रध्यक्षों के बीच की यह अनौपचारिक मिठास सोशल मीडिया यूजर्स को बेहद पसंद आई। लेकिन इस वायरल वीडियो का असर सिर्फ सोशल मीडिया लाइक्स और कमेंट्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका एक सीधा और अप्रत्याशित असर भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) पर भी पड़ गया।

जैसे ही मेलोडी टॉफी की यह खबर और वीडियो वायरल हुआ, शेयर बाजार के कुछ उत्साही निवेशकों ने बिना सोचे-समझे और बिना किसी गहन रिसर्च के 'पारले इंडस्ट्रीज' (Parle Industries) के शेयरों की धड़ल्ले से खरीदारी शुरू कर दी। निवेशकों को लगा कि मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी यही है। इस अंधाधुंध खरीदारी का नतीजा यह हुआ कि महज 22 दिनों के भीतर इस कंपनी के शेयर ने 116 फीसदी का छप्परफाड़ रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल कर दिया।

अगर तारीखों और आंकड़ों के गणित को समझें, तो दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात का यह वीडियो 20 मई को सोशल मीडिया पर चर्चा में आया था। ठीक उसी दिन शेयर बाजार में पारले इंडस्ट्रीज का स्टॉक महज 5 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा था। जैसे ही मेलोडी वाली खबर ने बाजार के गलियारों में जोर पकड़ा, इस शेयर को खरीदने के लिए निवेशकों की होड़ मच गई। मांग इतनी बढ़ गई कि शेयर में रोजाना अपर सर्किट (Upper Circuit) लगने लगा। महज तीन हफ्ते के भीतर, यानी 11 जून तक यह स्टॉक 5 प्रतिशत के रोजाना उछाल के साथ 10.81 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। यानी जिन निवेशकों ने 20 मई को इस शेयर में सिर्फ नाम देखकर पैसा लगाया था, उनका निवेश महज 22 दिनों में दोगुने से भी अधिक हो गया।

अब इस पूरी घटना के सबसे मजाकिया और हैरान करने वाले पहलू की बात करते हैं। निवेशकों ने जिस 'पारले इंडस्ट्रीज' के शेयरों को मेलोडी टॉफी की कंपनी समझकर खरीदा, उसका इस टॉफी से दूर-दूर तक कोई लेना-देना ही नहीं है। पारले इंडस्ट्रीज वास्तव में बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), रियल एस्टेट विकास और पेपर वेस्ट रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में काम करने वाली मुंबई की एक छोटी कंपनी है। असली मेलोडी टॉफी, पारले-जी बिस्कुट, मोनाको और हाइड एंड सीक बनाने वाली कंपनी का नाम 'पारले प्रोडक्ट्स' (Parle Products) है, जो कि शेयर बाजार में लिस्टेड (पंजीकृत) ही नहीं है। नाम के इसी भ्रम (Identity Confusion) के कारण निवेशकों ने गलत कंपनी में पैसा लगा दिया, जिसे बाजार की भाषा में 'मिस्टेकन आइडेंटिटी रैली' कहा जाता है। यह घटना निवेशकों को यह सबक देती है कि बाजार में बिना पूरी पड़ताल और रिसर्च के निवेश करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।


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